शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

*हवा के शब्दांश
बिना भय के बढती औरत
कितनी विलक्षण लगती है
बदलियों संग उड़ानें भरती हैं ख्वाहिशें उसकी
चाँद को देख भूल उठती है अपनी उदासी
सितारों में छिटका खत्म कर देती है गलतफहमी अपनी
जमीन पर घिसट कर चलती औरत
कीचड़ में लिथड़ा होता है उसका नसीब
लहरों पर पड़ी रेशम की तरह गल जाते हैं सपने सारे
रेत में, दफ़न कर देते हैं उसे उसके भय
और गुलाबी रंगत वाली त्वचा
नारंगी और चैरी के कॉकटेल की तरह हो जाती है बैजनी
हवा में झोंके की तरह उडती औरत
आसमानी रंग में रंगी होती हैं उसकी पलकें
नारंगी के फूलों की सुगंध से सराबोर होती हैं उसकी साँसें
सितारों की टोलियों में केसर सी घुली वह
जंगल के तूफानी कोहरे में उलझी होती है पत्तियों के बीच कहीं
सफ़ेद कैनवस पर
कूची की एक छुवन भर से ही
मानो जी उठती है औरत
कागज और रंग मिलते ही फूट उठते हैं उसके अहसास
हवा पर लिखे शब्दांशों को समझने की कोशिश करती
बुत बनी रहती है वह बरसो-बरस
बह उठती है वह
आंसुओं के संग कभी लहरों के
तो कभी गर्मियों की बारिश के संग
कागज के रूप में एक साथी पाकर
तोहफ़े में खुद को देती है एक पन्ना
उफनती दवात में उसे नज़र आता है
एक भंवर उठता हुआ
कुदरत से मिला
असीम अनुराग स्पन्दित करता रहता है उसे
उससे भी आगे उछाले मारता है उसमें लाड-दुलार का सोता
गुम हुईं चिट्ठियाँ दौड़ती रहती हैं उसकी नसों में
बोध तो जैसे चिपका रहता है उसकी त्वचा के नीचे
वो औरत जिसे किसी का इंतज़ार नही
सुनती रहती है अपनी थरथराती धडकनों को
-Xanath Caraza
A Spanish poet and a short story writer
(अंग्रेजी से अनुवाद)
#neetta_porwal
एक रोज कहीं
किसी ने पियानो पर एक धुन छेड़ी
समय और स्थान से परे
वह आवाज मेरे कानों को सहलाती है
हवा में स्पंदन अब भी है
दूर से आती वह मीठी सरसराहट
जिसे मैं शब्दों में बयाँ नही कर सकता
मैं तो हवा में सरसराते कुंज के दरख्तों की तरह
सिर्फ अपने आप को समर्पित कर सकता हूँ
पहली संगीतमयी ध्वनि कब पैदा हुई थी?
रिक्त ब्रह्मांड के बीच
एक संकेत-लिपि की तरह जिसे किसी ने कभी
गुप्त और रहस्यात्मक रूप से भेजा होगा ...
संगीत महान हस्तियों ने नहीं रचा
उन्होंने तो उसे आत्मसात करने के लिए अपने कान मूंदे
और सजदा करते हुए बस मौन को सुनते रहे
मौन जो समय की तरह अविनाशी है
- शुंतारो तानिकावा
हिंदी अनुवाद: neetta porwal

*रोप दो कुछ
बनाओ
एक ऊटपटाँग तस्वीर
रचो
दिलचस्प एक कविता
गुनगुनाओ
बेतुका कोई गीत
सीटी बजाओ कंघी से
नाचो दीवानों की तरह
फलाँग जाओ रसोई का फ़र्श
रोप दो दुनिया में थोड़ा भोलापन
करो
जो पहले किसी ने
न किया हो
________________________________
*आमन्त्रण (जब रास्ते खत्म लगने लगें)
अगर तुम एक स्वप्न दृष्टा हो,
तो आओ
अगर तुम एक स्वप्नदृष्टा,
एक दीवाने, एक गप्पी हो
अगर तुम एक आशावादी, एक उपासक,
मेरे इन जादुई बीजों के ख़रीदार हो
अगर तुम एक छलिया हो,
तो आओ,
मेरे पास बैठो
क्योंकि हमारे पास बुनने के लिए हैं
सन की तरह कुछ सुनहली कहानियाँ
तो आओ,
आ जाओ
____________________________
*अब से हर बरस
हालाँकि मैं तुम्हारा चेहरा नहीं देख सकता
जैसे कि तुम कविताओं को उलट-पलट कर देखती हो,
दूर .... कहीं दूर से
मैं तुम्हें हँसते हुए सुनता हूँ -
और मुस्कुरा देता हूँ
______________________________
*सुखद अंत?
कोई भी अंत
सुखद नहीं होता
अंत सबसे दुखद हिस्सा है
तो बस मुझे एक खुशहाल मध्य दो
और एक खुशनुमा खूबसूरत शुरुआत 
_______________________________
-शैल सिल्वरस्टीन, एक कवि, एक गायक-गीतकार, पटकथा लेखक, नाटककार, कार्टूनिस्ट, दुनिया भर के बच्चों के चेहरों पर मुस्कराहट लाने वाले एक जीवट शख्सियत
अंग्रेजी से अनुवाद: #नीता