*धर्म
गूंज सकता था
कण-कण में
मेरे जिस वाद्य यंत्र से
सुरीला संगीत
कण-कण में
मेरे जिस वाद्य यंत्र से
सुरीला संगीत
हत भाग!
आज फूट रहा हृदयभेदी प्रलाप
हर ओर
बहरा करता संवेदनाओं को
अवरुद्ध करता मार्ग रौशनियों का
आज फूट रहा हृदयभेदी प्रलाप
हर ओर
बहरा करता संवेदनाओं को
अवरुद्ध करता मार्ग रौशनियों का
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*धर्म
मगन हो
तुम मद में चूर हो
आज रचते बेसुरी कर्कश धुनों को
मेरे तानपूरे पर
पर देखो
मैं रक्त रंजित कर रहा हूँ
तुम्हारी उँगलियों के साथ
समूचे समय को भी
तुम मद में चूर हो
आज रचते बेसुरी कर्कश धुनों को
मेरे तानपूरे पर
पर देखो
मैं रक्त रंजित कर रहा हूँ
तुम्हारी उँगलियों के साथ
समूचे समय को भी
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कितना आसान है
घट-घट में धड़कते मेरे अनंत रूप को
चार दीवारी में कैद कर देना
घट-घट में धड़कते मेरे अनंत रूप को
चार दीवारी में कैद कर देना
बना
देना प्रतिमा
प्राण प्रतिष्ठित कर
फिर बोल देना मुझे ‘स्टेच्यु’
आह! कितना आसान है
फिर मेरे समस्त जीवों के प्रति क्रूर हो जाना
प्राण प्रतिष्ठित कर
फिर बोल देना मुझे ‘स्टेच्यु’
आह! कितना आसान है
फिर मेरे समस्त जीवों के प्रति क्रूर हो जाना
कोई लाख लिख दे बड़े-बड़े अक्षरों में-
'मना है प्रतिमाओं पर जल व प्रसाद चढ़ाना'
फिर भी अधीर हो उड़ेल देना जल
भर देना नयनों में सिंदूर
सिर पर फिक्क से फोड़ देना बताशा
आह! कितना आसान है
मेरी आराधना कर लेना
'मना है प्रतिमाओं पर जल व प्रसाद चढ़ाना'
फिर भी अधीर हो उड़ेल देना जल
भर देना नयनों में सिंदूर
सिर पर फिक्क से फोड़ देना बताशा
आह! कितना आसान है
मेरी आराधना कर लेना
भूखे-लाचार मेरे बच्चों को दुत्कार
भेंट में देना मुझे सोने-चांदी के छत्तर
सामने सजा देना छप्पन भोग
आह! कितना आसान है
फिर मुझे प्रसन्न मान लेना
भेंट में देना मुझे सोने-चांदी के छत्तर
सामने सजा देना छप्पन भोग
आह! कितना आसान है
फिर मुझे प्रसन्न मान लेना
साल में दो बार
कन्याओं के पूज लेना पाँव
ओढा कर चुनरी
आह! कितना आसान है
चूनर को फिर बेहिचक तार-तार कर देना
कन्याओं के पूज लेना पाँव
ओढा कर चुनरी
आह! कितना आसान है
चूनर को फिर बेहिचक तार-तार कर देना
जीते जी भूले से भी
माँ-बाबा की सुधि न लेना
फिर अनहोनी के भय से
बरस में एक बार जिमा देना वामन
आह! कितना आसान है
तुम्हारा हर ऋण से उद्धार हो जाना
माँ-बाबा की सुधि न लेना
फिर अनहोनी के भय से
बरस में एक बार जिमा देना वामन
आह! कितना आसान है
तुम्हारा हर ऋण से उद्धार हो जाना
ओ मेरे बच्चे!
नवधा भक्ति में
ये कौनसी और कैसी अलबेली है
तुम्हारी भक्ति
तुम्हारी ये आराधना?
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*गणेश चतुर्थी
नवधा भक्ति में
ये कौनसी और कैसी अलबेली है
तुम्हारी भक्ति
तुम्हारी ये आराधना?
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*गणेश चतुर्थी
तो आज ले आये मुझे
तुम अपने शीश पर धर
धन्य हुआ मैं!
तुम अपने शीश पर धर
धन्य हुआ मैं!
पर
क्या करूँगा
इस रेशमी पीत पटके का
जब वस्त्र विहीन हैं बच्चे
जब हर ओर तार-तार हो रही चूनर
क्या करूँगा
इस रेशमी पीत पटके का
जब वस्त्र विहीन हैं बच्चे
जब हर ओर तार-तार हो रही चूनर
कैसे स्वीकारू मोदक
कैसे स्वीकारू मेवा मिष्ठान
जब कचरे की ढेरी में
ढूंड रहे निवाला मेरे नौनिहाल
कैसे स्वीकारू मेवा मिष्ठान
जब कचरे की ढेरी में
ढूंड रहे निवाला मेरे नौनिहाल
आखिर कैसे स्वीकारू
तन-मन-धन से की गयी
हित-अहित का भेद करना भूल गयीं
तुम्हारी प्रार्थनाएं
तन-मन-धन से की गयी
हित-अहित का भेद करना भूल गयीं
तुम्हारी प्रार्थनाएं
नही सुहाती मुझे
तुम्हारे द्वारा की गयी शंख ध्वनि
हर ओर सुनाई देते करुण क्रंदन से
पहले ही घायल हैं ये कर्ण-विवर
तुम्हारे द्वारा की गयी शंख ध्वनि
हर ओर सुनाई देते करुण क्रंदन से
पहले ही घायल हैं ये कर्ण-विवर
ओह मेरे बच्चे
तुम्हें याद रहती है सिर्फ
मेरी शानदार आव-भगत
और मैं चाहकर भी नही भूल पाता
विसर्जन के पश्चात
कूड़े कचरे से अटी नदियाँ
घाटों पर औंधे पड़े मेरे अपने अवशेष
तुम्हें याद रहती है सिर्फ
मेरी शानदार आव-भगत
और मैं चाहकर भी नही भूल पाता
विसर्जन के पश्चात
कूड़े कचरे से अटी नदियाँ
घाटों पर औंधे पड़े मेरे अपने अवशेष
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